छिपकलियां
सफेद धुली दीवार पर
बैठी है छिपकली
घात लगाए
और
सफेद धुली पोशाकों में भी
कुछ छिपकलियां
घात लगाए,
मौकों की तालाश में......
.........सैंकड़ों पतंगे
हर दिन होते शहीद
शहीद हो जाती हैं
खुद भी ये छिपकलियां
क्योंकि
सफेद धुली पोशाकों में
घात लगाती
ये सिर्फ मौके तालाश करती हैं
पतंगों और छिपकलियों में
भेद नहीं रखती............
और
सफेद धुली दीवार पर बैठी
छिपकली से
अलग हो जाती है।
13 years ago
1 comment:
ये वर्ड वेरिफिकेशन का झंझट हटा लें. बड़ी कोफ्त होती है टिपण्णी करने वालों को.
स्वागत है ब्लॉग जगत में आपका
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